9 दिन तक जिंदगी की जंग लड़ती रहीं अनिता, मौत के बाद दो लोगों को देंगी नई रोशनी

सड़क हादसे में घायल अनिता सैनी की मौत, परिजनों ने दान की दोनों आंखें; दो लोगों को मिलेगी नई रोशनी

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झुंझुनूं। जिले के ओजटू बाइपास पर हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल मोहनका ढाणी निवासी अनिता सैनी का जयपुर में उपचार के दौरान निधन हो गया। अनिता की मौत से परिवार में शोक की लहर है। इस दुख की घड़ी में भी परिजनों ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए उनकी दोनों आंखें दान करने का निर्णय लिया। अनिता के नेत्रदान से दो लोगों के जीवन में रोशनी आने की उम्मीद है।

हादसे के नौ दिन बाद जिंदगी की जंग हार गई अनिता

जानकारी के अनुसार, 10 अक्टूबर की सुबह अनिता सैनी अपने पति सुशील सैनी के साथ ऊंटगाड़ी में सवार होकर खेत जा रही थीं। इसी दौरान ओजटू बाइपास पर एक ट्रेलर ने उनकी ऊंटगाड़ी को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी गंभीर थी कि हादसे में ऊंट की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अनिता और उनके पति सुशील सैनी गंभीर रूप से घायल हो गए।

दोनों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए जयपुर रेफर किया गया था। जयपुर में उपचार के दौरान शनिवार को अनिता सैनी ने दम तोड़ दिया। हादसे के बाद से ही परिवार उनकी सलामती की उम्मीद लगाए हुए था, लेकिन आखिरकार अनिता जिंदगी की जंग हार गईं।

परिजनों ने नेत्रदान कर पेश की मानवता की मिसाल

अनिता सैनी के निधन के बाद परिजनों ने ऐसा फैसला लिया, जिससे उनकी आंखों के माध्यम से दूसरे लोगों के जीवन में उजाला आ सके। परिवार ने अनिता की दोनों आंखें दान करने का निर्णय लिया।

इस पुनीत कार्य में अनिता के देवर टेकचंद, कुलदीप, छवि प्रकाश, प्रवीण कटारिया और विशाल कटारिया सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने सहयोग किया। नेत्रदान की प्रक्रिया के बाद आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान की ओर से परिजनों को दृष्टि दाता सम्मान पत्र भेंट किया गया।

परिवार के इस फैसले ने दुख की घड़ी में भी समाज को मानवता और दूसरों की जिंदगी में खुशियां बांटने का संदेश दिया है।

एसएमएस अस्पताल में भर्ती हैं पति सुशील, पत्नी की मौत की खबर नहीं दी

हादसे में गंभीर रूप से घायल सुशील सैनी का जयपुर के एसएमएस अस्पताल में उपचार चल रहा है। हादसे में उनके दोनों पैर टूट गए थे। जानकारी के अनुसार, उनके दो बार ऑपरेशन भी किए गए हैं।

बताया जा रहा है कि सुशील सैनी को अभी तक उनकी पत्नी अनिता की मौत की जानकारी नहीं दी गई है। एक ओर परिवार अनिता को खोने के गम में डूबा है, वहीं दूसरी ओर सुशील अस्पताल में जिंदगी और स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

तीन बच्चों के सिर से उठा मां का साया

अनिता सैनी की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। दंपती की दो बेटियां और एक बेटा है। मां के निधन से बच्चों के सिर से ममता का साया उठ गया है।

अनिता देवी का अंतिम संस्कार चिड़ावा के मुक्तिधाम में किया गया। हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं, लेकिन परिजनों द्वारा किए गए नेत्रदान से दो लोगों को नई रोशनी मिलने की उम्मीद जगी है।

अनिता सैनी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके नेत्रदान का फैसला दूसरों के जीवन में उजाला लाने का माध्यम बनेगा। दुख की घड़ी में परिवार का यह कदम समाज के लिए प्रेरणादायक है।