Balaji Mandir Salasar सालासर बालाजी मंदिर में मोबाइल और स्मार्ट वॉच पर प्रतिबंध, बढ़ती अव्यवस्था और रील बनाने के ट्रेंड के बीच बड़ा फैसला
सालासर (चूरू): राजस्थान के प्रसिद्ध सालासर बालाजी मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ा नियम लागू किया गया है। अब मंदिर परिसर में श्रद्धालु मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लेकर प्रवेश नहीं कर सकेंगे। यह निर्णय मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, बढ़ती अव्यवस्थाओं पर रोक लगाने और सोशल मीडिया के लिए रील बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
SDM ने जारी किए आदेश
सालासर के उपखंड अधिकारी (SDM) ओमप्रकाश वर्मा ने आदेश जारी करते हुए मंदिर परिसर में मोबाइल, स्मार्ट वॉच सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है। प्रशासन का कहना है कि हाल के दिनों में मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा रील और वीडियो बनाने की होड़ के कारण दर्शन व्यवस्था प्रभावित हो रही थी।
इसके अलावा कुछ मामलों में श्रद्धालुओं के बीच दुर्व्यवहार, धक्का-मुक्की और सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी सामने आई थीं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया है।
क्यों लगाया गया प्रतिबंध?
प्रशासन के अनुसार इस निर्णय के पीछे कई प्रमुख कारण हैं—
• मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना।
• दर्शन के दौरान होने वाली अव्यवस्था और भीड़ नियंत्रण।
• सोशल मीडिया के लिए रील और वीडियो बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक।
• श्रद्धालुओं को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित वातावरण में दर्शन की सुविधा देना।
• दुर्व्यवहार और अनुशासनहीनता की घटनाओं को रोकना।
श्रद्धालुओं को क्या करना होगा?
अब सालासर बालाजी मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में प्रवेश से पहले अपने मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच और अन्य प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्धारित स्थान पर जमा कराने होंगे। इसके बाद ही उन्हें मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिलेगी।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे नए नियमों का पालन करें और मंदिर में दर्शन के दौरान अनुशासन बनाए रखें। अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और मंदिर की गरिमा बनाए रखने के लिए लिया गया है।
निष्कर्ष
देशभर से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र सालासर बालाजी मंदिर में लागू किया गया यह नया नियम मंदिर की व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे भीड़ प्रबंधन बेहतर होगा और श्रद्धालुओं को शांतिपूर्ण वातावरण में दर्शन का लाभ मिलेगा।
