औपचारिक रूप से 8 अक्टूबर 1932 को अपने ऑपरेशंस शुरू करने वाली भारतीय वायुसेना आज अपना 88वां स्थापना दिवस मना रही है। पहली बार वायुसेना ने एक अप्रैल 1933 को उड़ान भरी थी। पहला ऑपरेशन वजीरिस्तान में कबाइलियों के खिलाफ था। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान इसे विस्तार दिया गया। इस दौरान बर्मा में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। 1945 में यह रॉयल इंडियन एयर फोर्स कहलाई, लेकिन 1950 में गणराज्य बनते ही रॉयल शब्द हटा दिया गया।
इंडियन एयर फोर्स की जिम्मेदारी भारत को सभी संभावित खतरों से बचाना है और साथ ही आपदाओं में राहत एवं बचाव कार्यों की भी है। वायुसेना कई युद्धों में शामिल रही है- दूसरा विश्वयुद्ध, भारत-चीन युद्ध, ऑपरेशन कैक्टस, ऑपरेशन विजय, करगिल युद्ध, भारत-पाकिस्तान युद्ध, कॉन्गो संकट।
आज एयरफोर्स पांच ऑपरेशनल और दो फंक्शनल कमांड्स में बंटी हुई है। हर कमांड का नेतृत्व एयर मार्शल की रैंक के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ करते हैं। ऑपरेशनल कमांड का उद्देश्य जिम्मेदारी के क्षेत्र में एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल करते हुए मिलिट्री ऑपरेशन को अंजाम देना है। फंक्शनल कमांड की जिम्मेदारी युद्ध के लिए तैयार रहने की है। फ्लाइट इंटरनेशनल के मुताबिक इंडियन एयर फोर्स में 1,721 एयरक्राफ्ट हैं, जिनमें Su-30MKI, जगुआर, मिराज-2000, अपाचे और चिनूक शामिल हैं। 8 अक्टूबर को होने वाले फ्लाई पास्ट में पहली बार रफाल भी शामिल होने वाला है।