CBI अधिकारी बनकर व्यापारी को डिजिटल अरेस्ट किया, 26.90 लाख रुपये की साइबर ठगी
नवलगढ़ में डिजिटल अरेस्ट का सनसनीखेज मामला
नवलगढ़। साइबर अपराधियों ने खुद को CBI अधिकारी बताकर नवलगढ़ के एक प्रतिष्ठित व्यापारी को डिजिटल अरेस्ट कर लिया और 26 लाख 90 हजार रुपये की बड़ी साइबर ठगी को अंजाम दिया। ठगों ने व्यापारी को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाकर लगातार मानसिक दबाव में रखा।
पीड़ित व्यापारी प्रदीप सिंगड़ोदिया, जो नवलगढ़ के मुख्य बाजार में व्यापार करते हैं, ने इस मामले को लेकर नवलगढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। पुलिस के अनुसार ठगी की यह वारदात 15 दिसंबर से शुरू हुई थी।
मनी लॉन्ड्रिंग केस का भय दिखाकर किया डिजिटल अरेस्ट
साइबर ठगों ने फोन और ऑनलाइन कॉल के जरिए खुद को CBI का अधिकारी बताते हुए व्यापारी को बताया कि उनके खाते में संदिग्ध लेन-देन सामने आया है और वे मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंस सकते हैं। इसके बाद व्यापारी को किसी से भी संपर्क न करने और हर समय वीडियो कॉल पर रहने का दबाव बनाया गया, जिसे साइबर अपराध की भाषा में डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है।
डर और दबाव के चलते व्यापारी ने ठगों के बताए खातों में अलग-अलग किश्तों में 26.90 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
FD तुड़वाने पर बेटी के ई-मेल से खुला राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब ठगों के कहने पर व्यापारी एफडी तुड़वाकर रकम निकालने बैंक पहुंचे। इस दौरान बैंक से संबंधित ई-मेल मैसेज उनकी बेटी के मेल आईडी पर पहुंच गया। संदेह होने पर बेटी ने परिजनों को सूचना दी, जिसके बाद परिवार ने तुरंत व्यापारी को संभाला और पुलिस से संपर्क किया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई, 5 लाख रुपये होल्ड
सूचना मिलते ही नवलगढ़ थाना प्रभारी सीआई अजय सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की। पुलिस ने संबंधित बैंक से संपर्क कर 5 लाख रुपये की राशि को होल्ड करवा दिया है। शेष राशि की रिकवरी के लिए पुलिस टीम लगातार प्रयास कर रही है और साइबर ठगों के बैंक खातों व कॉल डिटेल्स की जांच की जा रही है।
डिजिटल अरेस्ट क्या होता है?
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगों की एक नई चाल है, जिसमें अपराधी खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को डराते हैं और उसे मानसिक रूप से अलग-थलग कर देते हैं। पीड़ित से कहा जाता है कि वह किसी से बात न करे और लगातार कॉल या वीडियो कॉल पर बना रहे।
पुलिस की आमजन से अपील
नवलगढ़ पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि:
• कोई भी व्यक्ति खुद को CBI, ED, पुलिस या कोर्ट अधिकारी बताकर फोन करे तो उस पर तुरंत विश्वास न करें।
• कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती।
•संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
निष्कर्ष
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर ठग लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। जागरूकता और समय पर पुलिस की मदद से ही ऐसे अपराधों से बचा जा सकता है।
