झुंझुनूं में 12 लाख के ह्यूमन एल्ब्यूमिन इंजेक्शन चोरी का मामला: तीसरी गिरफ्तारी, जयपुर से आरोपी पकड़ा
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक बड़ा चोरी का मामला सामने आया है। नवलगढ़ जिला अस्पताल से करीब 12 लाख रुपए के ह्यूमन एल्ब्यूमिन इंजेक्शन चोरी के मामले में पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इस केस में अब तीसरी गिरफ्तारी हो चुकी है, जिससे पूरे मामले में नए खुलासे हो रहे हैं।
🚨 क्या है पूरा मामला?
यह मामला 2 अप्रैल 2026 को सामने आया, जब नवलगढ़ जिला अस्पताल से ह्यूमन एल्ब्यूमिन इंजेक्शन गायब होने की जानकारी मिली। अस्पताल प्रशासन द्वारा जांच करने पर पता चला कि 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच कुल 323 इंजेक्शन गायब हो चुके थे, जिनकी कीमत करीब 12 लाख रुपए आंकी गई।
👮♂️ तीसरी गिरफ्तारी: जयपुर से आरोपी पकड़ा
पुलिस ने इस मामले में तीसरी गिरफ्तारी करते हुए विकास कुमार सैनी (28) को जयपुर से पकड़ा है।
• निवासी: बबाई, झुंझुनूं
• पेशा: डायलिसिस टेक्निशियन
• कार्यस्थल: विद्याधर नगर, जयपुर का एक निजी अस्पताल
पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया है, ताकि मामले से जुड़े और सबूत जुटाए जा सकें।
🔗 पहले से जुड़े आरोपी और कनेक्शन
इस केस में पहले ही दो अन्य लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है:
• देवेंद्र सिंह (संविदाकर्मी, नवलगढ़ अस्पताल)
• दीपाली कुमावत (नवलगढ़ निवासी, जमानत पर रिहा)
पुलिस जांच में सामने आया है कि
👉 देवेंद्र सिंह और विकास सैनी के बीच पैसों का लेनदेन हुआ था
👉 दीपाली कुमावत और देवेंद्र के बीच भी मनी ट्रांजेक्शन के सबूत मिले हैं
यह साफ संकेत देता है कि यह चोरी एक संगठित नेटवर्क के तहत की गई थी।
📊 जांच में क्या-क्या सामने आया?
• 323 इंजेक्शन एक साल में गायब
• अस्पताल स्टाफ की संलिप्तता
• आपसी पहचान (कोर्स साथ में किया था)
• बैंक ट्रांजेक्शन से जुड़े पुख्ता सबूत
⚖️ पुलिस की कार्रवाई
• 5 अप्रैल 2026 को पीएमओ डॉ. महेंद्र सबलानिया ने रिपोर्ट दर्ज करवाई
• पुलिस ने सबसे पहले दीपाली कुमावत को गिरफ्तार किया
• पूछताछ के बाद देवेंद्र सिंह को पकड़ा गया
• अब तीसरे आरोपी विकास सैनी की गिरफ्तारी
• फिलहाल देवेंद्र सिंह और विकास सैनी से पूछताछ जारी है और दोनों को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा।
❗ स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जीवनरक्षक दवाइयों की इस तरह चोरी होना न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि मरीजों की जान के साथ भी खिलवाड़ है।
