Rajasthan Panchayat Election  जानिए क्या-क्या बदल जाएगा और किन कामों पर रहेगी रोक

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राजस्थान में आज से पंचायत चुनाव की आचार संहिता लागू, जानिए क्या होगा असर

राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: चार चरणों में होगा मतदान, 23 अक्टूबर से शुरू होगी चुनावी प्रक्रिया

जयपुर/राजस्थान। राजस्थान में पंचायती राज चुनाव 2026 का कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। राज्य में पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव चार चरणों में कराए जाएंगे। उपलब्ध चुनाव कार्यक्रम के अनुसार जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान 23 अक्टूबर से शुरू होकर 14 नवंबर तक चलेगा, जबकि पंच एवं सरपंच पदों के लिए मतदान 25 अक्टूबर से 16 नवंबर के बीच होगा।

चार चरणों में होगा मतदान

जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान का कार्यक्रम इस प्रकार है—

चरण मतदान की तारीख मतदान का समय

प्रथम चरण 23 अक्टूबर 2026, शुक्रवार सुबह 7 से शाम 6 बजे तक
द्वितीय चरण 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार सुबह 7 से शाम 6 बजे तक
तृतीय चरण 4 नवंबर 2026, बुधवार सुबह 7 से शाम 6 बजे तक
चतुर्थ चरण 14 नवंबर 2026, शनिवार सुबह 7 से शाम 6 बजे तक


मतदान के बाद जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों की मतगणना सभी चरणों के लिए 20 नवंबर 2026 को सुबह 8 बजे से जिला मुख्यालय पर होगी।

पंच-सरपंच के लिए अलग-अलग तारीखों पर मतदान

पंच और सरपंच पदों के लिए मतदान चार चरणों में होगा। इन पदों की मतगणना मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद संबंधित ग्राम पंचायत मुख्यालय पर की जाएगी।

प्रथम चरण: 25 अक्टूबर 2026

द्वितीय चरण: 31 अक्टूबर 2026

तृतीय चरण: 6 नवंबर 2026

चतुर्थ चरण: 16 नवंबर 2026


प्रत्येक चरण के अगले दिन उपसरपंच का चुनाव होगा। यानी क्रमशः 26 अक्टूबर, 1 नवंबर, 7 नवंबर और 17 नवंबर को उपसरपंच के चुनाव होंगे।

जिला प्रमुख, प्रधान और उप प्रधान के चुनाव

पंचायती राज चुनाव की प्रक्रिया केवल मतदान तक सीमित नहीं रहेगी। जिला परिषद और पंचायत समितियों के निर्वाचित सदस्यों के बाद प्रमुख पदों के चुनाव भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होंगे।

प्रधान का चुनाव: 25 नवंबर 2026

उप प्रधान का चुनाव: 26 नवंबर 2026

जिला प्रमुख का चुनाव: 27 नवंबर 2026

उप जिला प्रमुख का चुनाव: 28 नवंबर 2026


इसके साथ ही पंचायती राज संस्थाओं की चुनावी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

8 अक्टूबर से शुरू होगी नामांकन प्रक्रिया

जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के साथ पंच-सरपंच चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया अक्टूबर में शुरू होगी। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार संबंधित चुनावों के लिए अधिसूचना और नामांकन की तारीखें चरणवार निर्धारित की गई हैं।

राजस्थान के मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी 2 अक्टूबर को पंचायती राज प्रतिनिधियों के कार्यक्रम में पंचायतों और सरपंचों की भूमिका को लेकर जानकारी साझा की थी।

चुनाव कार्यक्रम एक नजर में

जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य:
23 अक्टूबर → 29 अक्टूबर → 4 नवंबर → 14 नवंबर

पंच/सरपंच:
25 अक्टूबर → 31 अक्टूबर → 6 नवंबर → 16 नवंबर

जिला परिषद/पंचायत समिति मतगणना: 20 नवंबर

प्रधान: 25 नवंबर

उप प्रधान: 26 नवंबर

जिला प्रमुख: 27 नवंबर

उप जिला प्रमुख: 28 नवंबर

चुनावी प्रक्रिया का समापन: 28 नवंबर 2026

चुनाव की तारीखों के साथ संबंधित क्षेत्रों में निर्वाचन प्रक्रिया और आचार संहिता लागू होने से प्रशासनिक एवं राजनीतिक गतिविधियों पर निर्वाचन संबंधी नियम प्रभावी रहेंगे। चुनाव से जुड़ी अंतिम अधिसूचनाओं और स्थानीय निर्देशों के लिए राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक सूचनाओं को प्राथमिकता दें।


राजस्थान में 41 जिला परिषद और 457 पंचायत समितियों के चुनाव होंगे

14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंचों के चुनाव होंगे

1,403 जिला परिषद सदस्य और 8,245 पंचायत समिति सदस्य चुने जाएंगे

41 जिला प्रमुख और 457 प्रधान चुने जाएंगे

आचार संहिता लगते ही क्या बदलेगा?

आचार संहिता का सबसे बड़ा असर सरकारी कामकाज और चुनाव प्रचार पर दिखाई देगा। चुनाव की घोषणा के बाद सरकार या प्रशासन ऐसे फैसले नहीं कर सकेगा, जिनसे किसी दल या प्रत्याशी को चुनावी लाभ मिलने की स्थिति बने।

1. नई योजनाओं की घोषणा पर रोक

आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार की ओर से ऐसी नई योजनाओं की घोषणा, जिनका उद्देश्य चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करना माना जा सकता है, पर रोक रहेगी।

नई परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण पर भी चुनाव आयोग की गाइडलाइन लागू होगी। चुनाव के दौरान सरकारी धन और मशीनरी का इस्तेमाल किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया जा सकेगा।

2. तबादलों पर रहेगी पाबंदी

चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर रोक लगने की संभावना है। चुनाव अवधि में प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति और स्थानांतरण निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार ही किए जाएंगे।

3. सरकारी मशीनरी का चुनाव में इस्तेमाल नहीं

मंत्री, जनप्रतिनिधि या राजनीतिक दल चुनाव प्रचार के लिए सरकारी वाहन, सरकारी भवन, सरकारी कर्मचारी अथवा अन्य सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।

सरकारी पद पर रहते हुए आधिकारिक दौरे और चुनाव प्रचार को मिलाने पर भी नियम लागू होंगे। चुनाव आयोग की आचार संहिता का प्रमुख उद्देश्य सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को रोकना है।

4. सरकारी विज्ञापनों पर भी नजर

आचार संहिता के दौरान सरकारी खर्चे पर ऐसे विज्ञापन जारी करने से बचना होगा, जिनमें सरकार की उपलब्धियों का प्रचार राजनीतिक लाभ के लिए किया जा सकता हो।

सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार पर चुनाव आयोग की निगरानी रहेगी।

प्रत्याशियों के लिए भी कड़े नियम

पंचायत चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों को प्रचार के दौरान कई नियमों का पालन करना होगा।

– मतदाताओं को रिश्वत या किसी प्रकार का प्रलोभन नहीं दिया जा सकेगा।
– जाति या धर्म के नाम पर वोट मांगने पर रोक रहेगी।
– धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जा सकेगा।
– दूसरे प्रत्याशी के निजी जीवन को लेकर अनावश्यक या अपमानजनक प्रचार से बचना होगा।
– बिना अनुमति किसी की जमीन, मकान या दीवार पर पोस्टर-बैनर नहीं लगाए जा सकेंगे।
– चुनावी सभाओं और जुलूसों के लिए संबंधित प्रशासन और पुलिस से आवश्यक अनुमति लेनी होगी।

लाउडस्पीकर और चुनाव प्रचार पर भी नियंत्रण

चुनावी सभाओं, रैलियों और जुलूसों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के लिए निर्धारित नियमों और अनुमति का पालन करना होगा।

चुनावी प्रचार के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था, यातायात और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियम भी लागू रहेंगे।

राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव को लेकर चुनावी खर्च, प्रचार वाहनों, पोस्टर-बैनर और लाउडस्पीकर से संबंधित नियम भी तय किए हैं।

मतदान के समय क्या रहेगा प्रतिबंध?

मतदान के दौरान मतदाताओं को किसी भी तरह प्रभावित करने, डराने-धमकाने या प्रलोभन देने पर रोक रहेगी।

मतदान केंद्र के आसपास चुनाव प्रचार और भीड़ जुटाने पर भी निर्धारित नियम लागू होंगे। मतदान समाप्ति से पहले निर्धारित अवधि में सार्वजनिक सभाओं और प्रचार पर प्रतिबंध रहता है।

पंचायत चुनाव में क्या-क्या होगा?

राजस्थान में इस बार पंचायतीराज चुनाव में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों का चुनाव होगा। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार करीब 1.69 लाख से अधिक जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे।

इनमें:

– 1,403 जिला परिषद सदस्य
– 8,245 पंचायत समिति सदस्य
– 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच
– करीब 1.30 लाख वार्ड पंच
– जिला परिषद सदस्यों से 41 जिला प्रमुख
– पंचायत समिति सदस्यों से 457 प्रधान

शामिल हैं।

सरपंच-पंच के लिए बैलेट पेपर, बाकी के लिए EVM

चुनाव की व्यवस्था में भी अंतर रहेगा। सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बैलेट पेपर से, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव EVM से कराए जाने की जानकारी सामने आई है।

करीब दो महीने रह सकती है आचार संहिता

चुनाव कार्यक्रम और मतदान के चरणों के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में आचार संहिता करीब दो महीने तक प्रभावी रहने की संभावना है। हालांकि इसकी वास्तविक अवधि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगी।

ग्रामीण राजस्थान में बढ़ेगी चुनावी सरगर्मी

आचार संहिता लागू होने के साथ ही गांवों में चुनावी गतिविधियां तेज हो जाएंगी। संभावित प्रत्याशी जनसंपर्क, बैठक और प्रचार की तैयारियों में जुटेंगे। वहीं प्रशासन चुनाव कार्यक्रम के अनुसार नामांकन, मतदान केंद्र, सुरक्षा व्यवस्था और चुनावी स्टाफ से संबंधित तैयारियों को अंतिम रूप देगा।

महत्वपूर्ण: आचार संहिता का औपचारिक प्रभाव राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आज चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ शुरू होगा। इसलिए अंतिम नियम, तारीखें और प्रतिबंध आयोग की आधिकारिक घोषणा के अनुसार ही माने जाएंगे।