चिरंजीवी शिविर में सांसे तेज चलने पर दिखाने आये बालक की ब्लड सुगर आई 528, बीडीके अस्पताल में भर्ती
झुंझुनूं : राजकीय बीडीके अस्पताल झुंझुनू में 13 वर्षीय बालक राहुल पुत्र श्री राजवीर निवासी महपलवास को अत्यधिक रक्त शुगर लेवल के कारण भर्ती किया कराया गया। परिजनों ने बताया कि सांसे तेज चलने के कारण महपलवास चिरंजीवी शिविर में चिकित्सकों को दिखाया गया।वहां पर चिकित्सकों ने ब्लड शुगर की जांच की तो शुगर का लेवल 528 आया। चिकित्सकों ने बच्चे को तुरंत 108 द्वारा शिविर से बीड़ी के अस्पताल झुंझुनूं भेजा गया। जहां पर यहां पर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ जितेंद्र भाम्बू ने आवश्यक जांच की एवं पाया कि बच्चा डायबिटीज टाइप 1 के कारण डायबिटीक किटो एसिडोसिस में जा रहा था। तुरंत इंसुलिन इंजेक्शन चालू कर ईलाज आरम्भ किया गया है।
पीएमओ एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ वीडी बाजिया ने बताया कि ब्लड शुगर का लेवल अत्यधिक बढ़ जाने पर ,शरीर में किटोन्स बढ जाते हैं तथा बच्चा डायबिटीक कोमा की तरफ चला जाता है।
डॉ जितेंद्र भाम्बू ने बताया कि बच्चों में स्कुल हैल्थ के तहत ब्लड शुगर की स्क्रीनिंग अति आवश्यक है। जिससे डायबिटीज का जल्दी पता चल सके एवं ईलाज समय पर आरम्भ किया जा सके तथा रोगी को गंभीर अवस्था में जाने से रोका जा सके।
सामान्यतः बच्चों में टाईप 1 डायबिटीज होता है।जो स्क्रीनिंग के अभाव में पता नहीं चल पाता है। अंततः बच्चा गंभीर कोमा की अवस्था में अस्पताल में भर्ती होता है। तब तक डायबिटीज शरीर के किडनी, आंख, हृदय,लीवर एवं नसों को गंभीर नुकसान पहुंचा चूका होता है।
सवाल जबाब
1. क्या बच्चों में डायबिटीज हो सकता है।
हां, बिल्कुल । बच्चों में टाईप 1 डायबिटीज काफ़ी काॅमन है।
2. क्या सामान्य ब्लड शुगर जांच द्वारा डायबिटीज का पता लगाया जा सकता है।हां, सामान्य ब्लड शुगर की जांच प्रत्येक निशुल्क सीएचसी/पीएचसी पर उपलब्ध है।
3. क्या समय पर पता लगाने पर ईसके गंभीर अवस्था में जाने से रोका जा सकता है।
हां ,ब्लड शुगर के लेवल को नियंत्रित कर गंभीर अवस्था में जाने से रोका जा सकता है।
4. कौनसे लक्षण वाले बच्चों की ब्लड शुगर की जांच अवश्य होनी चाहिए
बार-बार पेशाब का आना
बार-बार प्यास का लगना
भूख ज्यादा लगना, परंतु वजन का नहीं बढना।
कमजोर होते जाना।
चोट/घाव का लंबे समय तक ठीक नहीं होना।
5. क्या टाईप 1 डायबिटीज का ईलाज संभव है।
राजकीय अस्पतालों में इंसुलिन इंजेक्शन निशुल्क उपलब्ध है।तथा रोगी/परिजनों को समय-समय पर उपचार लेने पर डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है।

