सहायक प्रशासनिक अधिकारी सुरेश सेन की आत्महत्या मामला: परिजनों ने शव लेने से किया इनकार, आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग
एक दर्दनाक घटना ने प्रशासनिक हलकों में गहरा असर छोड़ा है। महिला अधिकारिता विभाग के सहायक प्रशासनिक अधिकारी सुरेश सेन की आत्महत्या के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। परिजनों ने शव लेने से इनकार करते हुए नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी तक अंतिम संस्कार न करने की चेतावनी दी है।
मामला क्या है
झुंझुनू शहर के बीरबल मार्केट में रविवार सुबह सनसनी फैल गई. जब मार्केट के मालिक और महिला अधिकारिता विभाग में सहायक प्रशासनिक अधिकारी सुरेश सैन का शव बेसमेंट में फांसी के फंदे से लटका मिला. परिवार ने बताया कि सुरेश पिछले कुछ महीनों से निजी कर्ज और सूदखोरों की मानसिक प्रताड़ना से परेशान थे. मौके से 4 पेज का सुसाइड नोट बरामद हुआ है.
7 लोगों के नाम लिखकर आरोप लगाया
नोट में सुरेश ने 7 लोगों के नाम लिखकर आरोप लगाया कि उन्होंने पैसे लौटा दिए. लेकिन, सूदखोरों ने लगातार ब्याज बढ़ाकर करोड़ों रुपए की मांग की और दुकान की रजिस्ट्री भी नहीं लौटाई. नोट में सुरेश ने परिवार से माफी मांगी और लिखा कि अब वह और संघर्ष नहीं कर सकता. परिवार के अनुसार सुरेश शुक्रवार शाम से लापता थे.
मार्केट में बेसमेंट का दरवाजा बंद पाया
सुबह उनके जीजा ने मार्केट में बेसमेंट का दरवाजा बंद पाया, तो अंदर झांका और उन्हें फांसी पर लटका देखा. सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची, और शव को बीडीके अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेजा. परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने नोट में नामजद 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
सुसाइड नोट को एफएसएल जांच के लिए भेजा
सुसाइड नोट को एफएसएल जांच के लिए भेजा जाएगा. पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में आर्थिक दबाव और सूदखोरों की प्रताड़ना आत्महत्या का मुख्य कारण सामने आया है. आगे की कार्रवाई में नोट में दर्ज सभी आरोपियों से पूछताछ की जाएगी और जरूरत पड़ने पर गिरफ्तारी भी होगी.
परिजनों का विरोध
शव पोस्टमार्टम के बाद पुलिस के सुपुर्द किया गया, लेकिन परिजन अभी तक शव लेने से इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक सुसाइड नोट में नामित आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, वे शव नहीं लेंगे।
परिजनों का आरोप है कि मृतक को लंबे समय से विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था। उन्हें कई बार धमकियां भी दी गईं, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
प्रशासन की भूमिका
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार प्रयास कर रहे हैं कि परिवार को समझाया जाए ताकि शव का अंतिम संस्कार किया जा सके। हालांकि, मृतक के परिजन न्याय की मांग पर अड़े हुए हैं और उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा।
जांच जारी
पुलिस ने सुसाइड नोट को अपने कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में कुछ आरोपों की पुष्टि करने के लिए दस्तावेज और बयान जुटाए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही कुछ नामजद व्यक्तियों से पूछताछ की जा सकती है।
