MD Drugs झुंझुनूं में पकड़ी 100 करोड़ की ड्रग फैक्ट्री, पूर्व सरपंच का भतीजा अनिल सिहाग चला रहा था फैक्ट्री MD ड्रग्स

Jhunjhunu News झुंझुनूं के नांद का बास में पकड़ी 100 करोड़ की ड्रग फैक्ट्री, पूर्व सरपंच का भतीजा अनिल सिहाग चला रहा था फैक्ट्री

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झुंझुनूं। महाराष्ट्र पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल ने झुंझुनूं पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए झुंझुनूं जिले में करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की एमडी (MD) ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा किया है। इस कार्रवाई में मुख्य आरोपी अनिल विजयपाल सिहाग को गिरफ्तार किया गया है।

खेत में बने मुर्गी फार्म की आड़ में चल रही थी फैक्ट्री

यह कार्रवाई धनूरी थाना क्षेत्र के नांदकाबास गांव में एक खेत में बने मुर्गी फार्म पर की गई। छापेमारी के दौरान पुलिस ने लगभग 10 किलोग्राम MD ड्रग्स, भारी मात्रा में रसायन और ड्रग्स निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यहां लंबे समय से अवैध रूप से नशीले पदार्थों का निर्माण किया जा रहा था।

उसने पूछताछ में बताया कि 15 दिन पहले ही इस फैक्ट्री में काम शुरू किया था। उसके साथी ने उससे 50 हजार रुपए किराए पर ये फैक्ट्री ली थी।

आरोपी रविवार को सुबह 1 किलो एमडी ड्रग्स सप्लाई करने सीकर पहुंचा तो पुलिस ने उसे कलेक्ट्रेट के सामने पकड़ लिया। इसके बाद तस्कर खुद पुलिस को फैक्ट्री तक लेकर गया। मामला झुंझुनूं के धनूरी थाना इलाके का है।

ठाणे की जांच से खुला झुंझुनूं का कनेक्शन

पुलिस के अनुसार, 4 अक्टूबर को ठाणे जिले में एक खुफिया-आधारित जांच के दौरान अनिल विजयपाल सिहाग का नाम सामने आया था। इससे पहले महाराष्ट्र पुलिस ने करोड़ों की MD ड्रग्स के साथ 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनसे मिले इनपुट और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर झुंझुनूं में यह बड़ी कार्रवाई की गई।

सीकर से गिरफ्तारी, फिर छापा

महाराष्ट्र पुलिस की टीम ने कल अनिल विजयपाल सिहाग को सीकर से गिरफ्तार किया। पूछताछ के बाद उसे झुंझुनूं लाकर मुर्गी फार्म पर छापा मारा गया, जहां पूरी तरह संगठित अवैध ड्रग फैक्ट्री संचालित होने के पुख्ता सबूत मिले।डोडा-चूरा तस्कर था अनिल

जांच में सामने आया कि अनिल सिहाग 12 वीं पास है और खेतीबाड़ी करता है। अनिल 2016-17 में अपने चाचा सुरेश सिहाग के मुर्गी फार्म में काम करने लगा था। इसी दौरान वह अपने दोस्त सुभाष जाट निवासी बाजला के संपर्क में आया। सुभाष की ‘मीनू ट्रेवल्स’ नाम से बसें चलती थीं।

सुभाष अपनी कार में नीमच से डोडा-पोस्त लाता था। इस दौरान वह भतीजे अनिल को भी साथ ले जाने लगा। अनिल ने सुभाष के साथ 5-7 चक्कर लगाए। इसके लिए उसे प्रति चक्कर 5 हजार रुपए मिलते थे। वे डोडा पोस्त को बगड़ रोड पर होटल और ढाबों पर सप्लाई करते थे।

डोडा-चूरा तस्कर था अनिल

जांच में सामने आया कि अनिल सिहाग 12 वीं पास है और खेतीबाड़ी करता है। अनिल 2016-17 में अपने चाचा सुरेश सिहाग के मुर्गी फार्म में काम करने लगा था। इसी दौरान वह अपने दोस्त सुभाष जाट निवासी बाजला के संपर्क में आया। सुभाष की ‘मीनू ट्रेवल्स’ नाम से बसें चलती थीं।

सुभाष अपनी कार में नीमच से डोडा-पोस्त लाता था। इस दौरान वह भतीजे अनिल को भी साथ ले जाने लगा। अनिल ने सुभाष के साथ 5-7 चक्कर लगाए। इसके लिए उसे प्रति चक्कर 5 हजार रुपए मिलते थे। वे डोडा पोस्त को बगड़ रोड पर होटल और ढाबों पर सप्लाई करते थे।

अनिल ने नीमच में हाईवे पर स्थित एक ढाबा मालिक पप्पू गुर्जर से संपर्क बनाया और खुद डोडा-पोस्त लाना शुरू कर दिया। वह एक पुरानी स्विफ्ट गाड़ी में डोडा पोस्त भरकर लाता था और तारानगर में अपने जानकार विकास जाट को बेचता था। इसमें उसे प्रति किलो 500 से 700 रुपए की बचत होती थी।

इस धंधे के दौरान एक बार सादुलपुर (चूरू) में पुलिस ने उसकी कार को रुकवाया तो वह भाग निकला और उसका साथी प्रदीप बलोदा पकड़ा गया। बाद में पुलिस ने अनिल को भी गिरफ्तार कर लिया। उस समय वह करीब 19 दिन तक जेल में रहा।

आगे की कार्रवाई

पुलिस अब नेटवर्क के अन्य सदस्यों, सप्लाई चेन और फाइनेंसिंग एंगल की जांच कर रही है। बरामद रसायनों और उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में और गिरफ्तारियां संभव हैं।