
सुलताना कस्बे में नेवी से रिटायर्ड नागरमल सैनी ने बेटा और बेटी को समान मानते हुए समाज के सामने उदाहरण पेश किया है। सुल्ताना कस्बे की ख़ातियो वाली ढाणी निवासी नागरमल सैनी ने बेटी सीमा को बेटे के बराबर मानते हुए पुरानी परंपराओ को भी दरकिनार कर दिया। नागरमल सैनी ने समाज को संदेश दिया कि आज बेटी और बेटे में कोई फर्क नहीं है।
नागरमल सैनी की बेटी सीमा का विवाह 15 नवम्बर को होना है। लडकों को घोडी पर बैठाकर बिंदोरी निकासी निकालने की परंपरा को नागरमल सैनी ने दरकिनार कर नई पंरंपरा की शुरुआत की। नागरमल सैनी ने अपनी बेटी सीमा को दूल्हे की तर्ज पर साफ़ा पहनाया और सजी धजी सीमा को घोड़ी पर बैठाया। जैसे ही सीमा को घोड़ी पर बैठाया हर किसी का चेहरा खिल उठा। बणी ठणी दूल्हे की वेशभूषा में सीमा को घोड़ी पर बैठाकर पूरी ढाणी में बिंदोरी निकाली गई। ढाणी में पहली बार अनूठी परम्परा की शुरुआत को देखकर सब चकित रह गये।
सामाजिक स्तर पर बेटी व बेटे को समानता का दर्जा मिले
सीमा के पिता नागरमल ने बताया कि लड़का घर को संवारता है पर लड़कियां दो दो घरों को संवारती हैं। नागरमल ने कहा कि वे समाज में यही संदेश देना चाहते है कि बेटियां बेटों से कम नहीं है। जरूरत है उन्हे प्रोत्साहित करने की। लिंगानुपात में बेटियों की कमी का दंश झेल रहे राजस्थान में सरकारी स्तर पर जरूर बेटियों को बराबरी के दर्जे की कवायद जारी है ।लेकिन सामाजिक स्तर पर जब तक बेटी व बेटे को समानता का दर्जा नहीं मिलेगा तब तक सरकार की मंशा पूरी नहीं हो पाएगी। सुल्ताना में सीमा की बिंदोरी जैसी पहल भी बेटियों को बराबरी के दर्जा दिलाने की दिशा में सामाजिक स्तर पर कारगर साबित होगी।