झुंझुनूं नगर परिषद चुनाव: सट्टा बाजार के अनुमान में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं, निर्दलीयों की भूमिका अहम
झुंझुनूं। निकाय चुनाव-2026 के तहत झुंझुनूं नगर परिषद के 60 वार्डों में मतदान संपन्न होने के बाद अब सभी की नजरें सोमवार को आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही बोर्ड बनाने का दावा कर रही हैं, वहीं बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी ने चुनावी समीकरणों को और रोचक बना दिया है।
इसी बीच सामने आए सट्टा बाजार के कथित अनुमानों में झुंझुनूं नगर परिषद में किसी भी प्रमुख दल को स्पष्ट बहुमत मिलता नजर नहीं आ रहा है। हालांकि, ये केवल बाजार के अनुमान हैं और इन्हें आधिकारिक चुनाव परिणाम या विश्वसनीय सर्वे नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस को सबसे बड़ी पार्टी बनने का अनुमान
सट्टा बाजार के अनुमान के अनुसार 60 सीटों वाली झुंझुनूं नगर परिषद में कांग्रेस को करीब 26 से 28 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। इसके आधार पर कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभर सकती है।
वहीं भाजपा को करीब 17 से 19 सीटें मिलने का अनुमान बताया गया है। अनुमान में यह भी कहा गया है कि भाजपा की कुछ पारंपरिक सीटों पर भी हार की संभावना जताई जा रही है, जिन सीटों पर पार्टी पिछले कई चुनावों से मजबूत मानी जाती रही है।
14 से 16 निर्दलीय जीतने का अनुमान
चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी दोनों प्रमुख दलों के सामने चुनौती पेश की है। बाजार के अनुमान के मुताबिक 14 से 16 निर्दलीय प्रत्याशियों के चुनाव जीतने की संभावना जताई गई है।
यदि यह अनुमान परिणामों के करीब रहता है तो बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। बहुमत के लिए 60 सदस्यीय बोर्ड में 31 पार्षदों का समर्थन जरूरी होगा।
निर्दलीयों ने बिगाड़ा भाजपा-कांग्रेस का गणित
चुनाव के दौरान कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों को सीधी चुनौती दी। सट्टा बाजार के अनुमान में भी निर्दलीयों को मिलने वाली सीटों की संख्या काफी महत्वपूर्ण बताई गई है।
अनुमान के अनुसार इस बार चुनावी गणित में आपसी भीतरघात और वोटों के बंटवारे का असर दिखाई दे सकता है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के कई प्रत्याशियों के सामने बागी अथवा निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में थे।
भाजपा-कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर
झुंझुनूं नगर परिषद में वर्ष 2019 के चुनाव में कांग्रेस मजबूत स्थिति में रही थी। इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला कड़ा माना जा रहा है। सट्टा बाजार के ताजा अनुमान में कांग्रेस को बढ़त दिखाई गई है, लेकिन अंतिम तस्वीर 14 सितंबर को होने वाली मतगणना के बाद ही साफ होगी।
निवर्तमान पार्षदों को लेकर भी असमंजस
सट्टा बाजार के कथित अनुमान में निवर्तमान पार्षदों को लेकर भी अनिश्चितता जताई गई है। कई स्थापित पार्षदों की सीटों पर भी हार की संभावना का अनुमान लगाया जा रहा है।
साथ ही, संभावित सभापति पद को लेकर भी फिलहाल कोई स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है। ऐसे में यदि किसी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
> महत्वपूर्ण: सट्टा बाजार के ये आंकड़े केवल अनुमान हैं। इन्हें चुनाव परिणाम, एग्जिट पोल या आधिकारिक सर्वे न माना जाए। वास्तविक परिणाम निर्वाचन विभाग की मतगणना के बाद ही सामने आएंगे।
