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नवलगढ़ : सेना भर्ती के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, भर्ती-ट्रेनिंग का नाटक कर ठगे 29 लाख रुपये

सेना में भर्ती के नाम पर ठगी करने के मामले में नवलगढ़ पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह के 2 शातिर युवकों को गिरफ्तार किया है। इनका नाम किरणपाल उर्फ किरण सिंह और सौरभ श्रीवास्तव है। इनकी गिरफ्तारी दिल्ली एनसीआर से हुई है। आरोप है कि फर्जी एडमिट कार्ड तक थमाया। इसके बाद रांची में ट्रेनिंग का नाटक भी रचा। इसके बाद अचानक गायब हो गए। 6 अभ्यर्थियों से 28-29 लाख रुपए ऐंठ लिए हैं। इन्हीं में से एक पीड़ित ने थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
एसएचओ नवलगढ़ सुनील शर्मा ने बताया कि नवलडी गांव के विकास कुमार जाट ने रिपोर्ट दी थी कि यूपी निवासी किरण पाल ने ठगी को अंजाम दिया है। उसने रांची में सेना में भर्ती कराए जाने का विश्वास दिलाया। विश्वास में आकर विकास अपने पांच दोस्तों अनिल, रविन्द्र, मनोज, आनन्द, रविंद्र के साथ मार्च में संपर्क किया।
सभी बेरोजगार अभ्यर्थी सेना में भर्ती के दौरान कोचिंग सेंटर पर ठगों के संपर्क में आए। ठगों ने अभ्यर्थियों को अपने जाल में फंसाकर उनका ब्रेनवाॅश किया। तीन किस्तों में रकम ऐंठी। अभ्यर्थियों ने रकम की राशि उन्हें कैश दी। वहीं, वॉट्सऐप के जरिए जब इन्हें लेटर भेजा गया तो अभ्यर्थियों को शक हुआ। ठगों ने कहा कि सेटिंग से जब भर्ती होती है तो अपॉइंटमेंट लेटर पहले ही आ जाता है। सबने सेना में भर्ती के लिए कुल 28-29 लाख रुपए दिए। फिर भी नौकरी नहीं मिली।
ऐसे करते थे बेरोजगारों से ठगी
पुलिस की प्रारंभिक जांच और पूछताछ में सामने आया कि सौरव श्रीवास्तव विभिन्न राज्यों के युवाओं से संपर्क करता था। बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलवाए जाने का विश्वास दिलाता था। इसके लिए कुछ लोगों के फर्जी नियुक्ति पत्र दिखाता था। प्रोसेस में चल रहे लोगों के एडमिट कार्ड और कॉल लेटर दिखाता था। आरोपी फोन से निरंतर संपर्क में रहकर नौकरी के लुभावने सपने दिखाते थे। युवाओं का ब्रेनवॉश करता था। इसी तरह 10-15 युवाओं का ग्रुप तैयार करता था।
ठगी का खेल
उसके बाद ठग ग्रुप वाइज सभी को दिल्ली होटल में डॉक्यूमेंट लेकर बुलाता था। डॉक्यूमेंट चेकिंग की कार्रवाई का दिखावा कर पहली किस्त प्राप्त कर ली जाती थी। इसके बाद दोबारा मेडिकल करवाए जाने के नाम पर दिल्ली या रांची बुलाया जाता था। यहां उनके फर्जी तरीके से मेडिकल करवाकर उनसे दूसरी किस्त भी प्राप्त कर लेते थे। उसके बाद में जब बेरोजगार युवक उनसे संपर्क करते तो टालमटोल कर प्रक्रिया को तेजी से करवाने और सेटिंग कराए जाने के बहाने तीसरी किस्त फिर से ऐंठ लेते।
सेना का फर्जी मोहर
पैसे लेने के बाद ठग अभ्यर्थियों को एक एडमिट कार्ड देते थे। इस पर सेना की मोहर लगी होती थी। बेरोजगारों को फर्जी तरीके से परीक्षा में शामिल होने का झांसा देते थे। ठग सभी अभ्यर्थियों को बताते थे कि आप जो पैसे दे रहे हैं, उसके कारण आपको परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं है। आप सिर्फ परीक्षा की उपस्थिति पत्र पर साइन कर दो। परीक्षा में पास हो जाओगे। उसके बाद अभ्यर्थियों से पूरी धनराशि प्राप्त कर लेते थे।
जॉइनिंग का करते थे नाटक
ठग अभ्यर्थियों से फर्जी एडमिट कार्ड वापस लेकर सेना में नियुक्ति पत्र वॉट्सऐप के जरिए भेज देते थे। इसके बाद रांची में एक फर्जी ट्रेनिंग कैंप खोलकर अभ्यर्थियों को जॉइनिंग भी करवाने का नाटक किया जाता था। फर्जी ट्रेनिंग कैंप के बाद ठग अपने मोबाइल बंद कर फरार हो जाते। एक-दूसरे से केवल वॉट्सऐप और इंटरनेट कॉलिंग के जरिए ही संपर्क में रहते थे। इस मामले में उच्च स्तर पर तकनीकी अनुसंधान करते हुए आरोपी ठगों को ट्रेस आउट कर गिरफ्तार किया गया है। मामले में जांच जारी है। जांच में सामने आया कि इस फर्जी कैंप में मिलिट्री इंटेलिजेंस ने पहले भी छापा हो चुका है। इस प्रकरण में गिरफ्तार अभियुक्त के रांची में काम करने वाले साथी भी रांची में पूर्व में गिरफ्तार हो चुके हैं।
दिल्ली एनसीआर से मिले सुराग
पुलिस ने मामला दर्ज कर ठगों की गिरफ्तारी के लिए थानाधिकारी सुनील शर्मा ने तत्काल ही टीम का गठन किया था। मामले की जांच एसआई कंचन को दी गई। मामले की जांच में टीम को दिल्ली एनसीआर से कुछ सुराग मिले। सूचना के आधार पर रवाना किया गया। टीम के द्वारा तकनीकी आधार पर अनुसंधान करने के बाद सौरभ श्रीवास्तव निवासी शिव विहार, दिल्ली को 2 सितम्बर को गिरफ्तार किया गया। इसे न्यायालय में पेश कर आठ दिन का पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। इसके बाद टीम ने शातिर ठग किरण पाल उर्फ किरण सिंह को दिल्ली से दस्तयाब कर रविवार को गिरफ्तार किया गया।

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