सरकारी कर्मचारियों के लिए झटका! निजी अस्पतालों में RGHS कैशलेस इलाज बंद

RGHS SCHEME राजस्थान सरकार द्वारा शुरू की गई RGHS (Rajasthan Government Health Scheme) का सबसे बड़ा आकर्षण था कैशलेस इलाज की सुविधा। इसके माध्यम से सरकारी कर्मचारी, पेंशनर्स व उनके परिजन बिना आर्थिक बोझ के निजी मान्यता प्राप्त अस्पतालों में इलाज करवा सकते थे। लेकिन आज से निजी अस्पतालों में यह सुविधा बंद कर दी गई है।

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राजस्थान एलायंस ऑफ ऑल हॉस्पिटल एसोसिएसन ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के अंतर्गत 25 अगस्त से कैशलेस उपचार सेवाओं के बहिष्कार की घोषणा की है। एसोसिएशन से प्रदेश के करीब 700 निजी अस्पताल और 4200 दवा विक्रेता जुड़े हुए हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में पूर्व में 20 अगस्त से इस योजना में कैशलेस इलाज का बहिष्कार की घोषणा की गई थी।

झुंझुनूं  उपचार के सचिव डॉ. कमल चंद सैनी ने बताया कि इस योजना में लगातार अस्पतालों का पेमेंट बकाया चल रहा है। योजना में भारी अनियमित्तयाए हैं सरकार के पास कोई स्पष्ट नियम इस योजना को चलाने के लिए नहीं है हर रोज़ बिना अस्पतालों को विश्वास में लिए मनमर्जी से अव्यावहारिक नियम और आदेश निकाल दिए जाते है साथ ही इस योजना में इलाज के दरें भी काफ़ी कम है जिनमे अब अस्पतालों के लिए काम करना संभव नहीं है इन्ही सब मांगों को लेकर आज से झुनझुन जिले के सभी 46 अस्पताल RGHS योजना में कैशलेस इलाज को बंद करेंगे। सभी RGHS के लाभार्थियों को कैश मोड में इलाज जारी रहेगा जिसका पुनर्भरण वो सरकार से बाद में कर सकते है।

क्या है पूरा मामला?


निजी अस्पताल प्रबंधन की ओर से लंबे समय से भुगतान को लेकर आपत्ति दर्ज कराई जा रही थी। अस्पतालों का कहना है कि—

• इलाज के दावों (Claims) को मंजूरी मिलने में बहुत समय लग रहा है।

• तय दरों पर इलाज कर पाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।

• कई मामलों में बकाया भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है।

इन्हीं कारणों से आज से निजी अस्पतालों ने RGHS के कैशलेस इलाज की सुविधा पर रोक लगाने की घोषणा कर दी है।

मरीजों पर असर


इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स, जिनके लिए यह योजना एक बड़ी राहत थी।
अब उन्हें—

• इलाज के समय अपनी जेब से रकम खर्च करनी होगी।

• बाद में रिइम्बर्समेंट (Reimbursement) की प्रक्रिया से पैसा वापस पाने की कोशिश करनी पड़ेगी।

• आर्थिक रूप से कमजोर पेंशनर्स और परिवारों पर सीधा असर पड़ेगा।