सचिन पायलट खेमे के विधायक गहलोत सरकार पर रोज नए हमले कर रहे हैं। पूरे घटनाक्रम में अब तक शांत बैठे झुंझुनूं से सचिन पायलट खेमे के कांग्रेस विधायक बृजेंद्र सिंह ओला ने अब गहलोत सरकार पर हमला बोला है। ओला ने मीडिया से बातचीत में कहा— पांच साल तक यहां हमने सचिन पायलट के साथ रहकर संघर्ष किया। किसानों और आम लाेगों के बीच गए और उनसे वादा किया कि कांग्रेस सरकार बनेगी तो सत्ता में उनकी भी हिस्सेदारी होगी। सरकार भी बन गई लेकिन अब तो विधायकों के ही काम नहीं हो रहे हैं, आम कार्यकर्ताओं की तो बात ही क्या करें? मौजूदा राजनीतिक माहौल में हम मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकते।
ओला ने कहा- कार्यकर्ताओं से किए वादे जल्द पूरे होने चाहिए। मेरे परिवार की राजनीतिक पृष्टभूमि कांग्रेस से ही जुड़ी रही है। मुझे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व पर पूरा विश्वास है। जिस कार्यकर्ता ने पार्टी के लिए काम किया है उसके विश्वास पर हमें खरा उतरना होगा, जनता ने कांग्रेस पर विश्वास करके वोट दिया है तो उस विश्वास पर खरा भी उतरना होगा।
यहां सुनवाई नहीं हो रही थी तभी पायलट साहब के नेतृत्व में दिल्ली गए थे
ओला ने कहा- कई बार हम पहले भी यह बात उठा चुके थे कि हमें कार्यकर्ता और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए काम करना होगा। यहां हमारी सुनवाई नहीं हो रही थी इसलिए हम पायलट साहब के नेतृत्व में दिल्ली गए थे। हम कांग्रेस के हित की बात कह रहे हैं, पार्टी को ढाई साल बाद फिर से चुनाव में जाना है, इसलिए जो वादे किए हैं उन्हें पुरा करना होगा। मौजूदा राजनीतिक माहौल में हम मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकते।
पायलट समर्थक विधायक रोज सरकार पर हमले कर रहे
सचिन पायलट कैंप के विधायक रोज गहलोत सरकार में कार्यकर्ता और विधायकों की सुनवाई नहीं होने का मुद्दा उठाकर सरकार को घेर रहे हैं। इससे पहले पायलट समर्थक वेदप्रकाश सोलंकी, हेमाराम चौधरी,दीपेंद्र सिंह शेखावत, मुकेश भाकर, रामनिवास गावड़िया भी गहलोत सरकाार पर सवाल उठा चुके हैं। वेदप्रकाश सोलंकी तो सरकार पर फोन टैपिंग तक के आरोप लगाकर सियासी हलचल मचा चुके हैं। अब ओला के बयान के भी गहरे सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
बृजेंद्र ओला विधानसभा के बजट सत्र में भी सरकार पर भेदभाव का आरोप लगा चुके
बृजेंद्र ओला ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पीडब्ल्यूडी की अनुदान मांगों पर बोलते हुए सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया था। ओला ने कहा था- ओला को खाली रख दो लेकिन जनता को तो खाली मत रखो। झुंझुनूं के लिए बजट में एक शब्द नहीं बोला। चिड़ावा से सुल्ताना सड़क इसलिए नहीं बना रहे कि रास्ते में मेरा गांव पड़ता है। मेरा गांव पड़ता है तो चिड़ावा से सुल्ताना की सड़क को मेरा गांव छोड़कर ही बना दीजिए।
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