Jhunjhunu News 20 साल से शादीशुदा महिला प्रेमी के साथ हुई फरार

Jhunjhunu News 20 साल से शादीशुदा महिला प्रेमी के साथ हुई फरार : बच्चों को पहचानने से किया इनकार

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झुंझुनूं : झुंझुनू जिले के गुढ़ा थाना क्षेत्र के बास बिसना भाटीवाड़ गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 20 साल से विवाहित महिला अपने प्रेमी के साथ फरार हो गई। महिला की इस हरकत से परिवार के सदस्य सकते में हैं, वहीं गांव में चर्चा का माहौल बना हुआ है।

मिली जानकारी के अनुसार महिला 9 जून को अपने प्रेमी के साथ फरार हो गई। महिला के 14 वर्षीय एक पुत्री व 16 वर्षीय एक पुत्र भी है। महिला सोनू योगी ने अपने पति,सास,ससुर व बच्चों को पहचानने से किया इंकार।

जब पति ने पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई और उसके कार्यस्थल पर संपर्क किया तो पता चला कि महिला 10 दिनों की छुट्टी पर है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि वहीं ऑफिस में कार्यरत झुंझुनूं के घोड़ीवारा गांव का एक युवक भी उन्हीं दिनों छुट्टी पर गया हुआ है। परिजनों को शक है कि महिला उसी युवक के साथ फरार हुई है।

परिवार की उम्मीद उस वक्त टूट गई जब महिला अपने मायके पहुंची और जब पति व बच्चे उसे समझाने पहुंचे तो उसने न केवल साथ जाने से इनकार किया बल्कि पति, सास-ससुर और अपने बच्चों तक को पहचानने से इंकार कर दिया।

स्वयं सहायता समूह के लाखों रुपए के गबन का भी आरोप

महिला सोनू पर स्वयं सहायता समूह के लाखों रुपये गबन का भी आरोप है। पीड़ित परिवार और समूह की महिलाओं ने कलेक्ट्रेट पर धरना दिया। महिलाओं का कहना है कि लोन की किस्त जमा न होने से बैंक दबाव बना रहा है। पीड़ित पति ने गुढ़ागौड़जी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित अब पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

महिला के पति पवन कुमार योगी के अनुसार सोनू योगी घर के पैतृक सोने-चांदी के गहने भी अपने साथ ले गई हैं। सबसे गंभीर आरोप यह है कि महिला ने समूह की आड़ में बैंकों से करीब 5 लाख रुपये का ऋण लिया था, जिसे न तो समूह में बांटा गया और न ही बैंक में जमा कराया गया। अब बैंककर्मी यह राशि समूह की अन्य सदस्यों से वसूल रहे हैं, जिससे समूह की महिलाओं में डर और गुस्सा है। धरने पर बैठी महिला सदस्यों ने कहा कि सोनू ने पहले सभी का विश्वास जीता और फिर समूह के नाम पर ऋण लिया, धीरे-धीरे सारी राशि अपने पास रखती गई और अंत में फरार हो गई। अब जब बैंक किश्तों की वसूली के लिए उनके घरों पर आ रहे हैं, तो वे खुद को पूरी तरह ठगा हुआ और असहाय महसूस कर रही हैं।