पिलानी में ATS की मॉक ड्रिल: BITS कैंपस में बंधक बनाए 2 लोगों को 15 मिनट में छुड़ाया
पिलानी स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (BITS पिलानी) कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) द्वारा एक हाई-लेवल मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस ड्रिल का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया क्षमता, समन्वय और ऑपरेशन की प्रभावशीलता को जांचना था।
क्या था पूरा मामला?
मॉक ड्रिल के दौरान एक काल्पनिक स्थिति बनाई गई, जिसमें एक आतंकी द्वारा कैंपस के अंदर दो लोगों को बंधक बनाने की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही कैंपस में हड़कंप मच गया और तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया गया।
15 मिनट में मौके पर पहुंची ATS टीम
सूचना के महज 15 मिनट के भीतर ATS-ERT (Emergency Response Team) मौके पर पहुंच गई। टीम ने हालात का जायजा लेते हुए तुरंत ऑपरेशन शुरू किया। पूरी कार्रवाई बेहद योजनाबद्ध और रणनीतिक तरीके से की गई ताकि बंधकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सुरक्षित रेस्क्यू ऑपरेशन
ATS टीम ने तेज़ और सटीक कार्रवाई करते हुए दोनों बंधकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। ऑपरेशन के दौरान किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई, जो इस ड्रिल की सफलता को दर्शाता है।
जवाबी कार्रवाई में आतंकी ढेर
ड्रिल के हिस्से के रूप में जवाबी कार्रवाई का भी प्रदर्शन किया गया, जिसमें एक आतंकी को निष्क्रिय (ढेर) किया गया। यह हिस्सा सुरक्षा बलों की कार्रवाई और तैयारी को दर्शाने के लिए शामिल किया गया था।
क्यों जरूरी हैं ऐसी मॉक ड्रिल?
ऐसी मॉक ड्रिल वास्तविक परिस्थितियों के लिए तैयारी का अहम हिस्सा होती हैं। इससे:
• सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया समय का परीक्षण होता है
• विभिन्न टीमों के बीच समन्वय बेहतर होता है
• संभावित खतरों से निपटने की रणनीति मजबूत होती है
प्रशासन ने क्या कहा?
कैंपस प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने इस मॉक ड्रिल को सफल बताया। अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में भी इस तरह के अभ्यास नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे ताकि सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा सके।
