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Sukhdev Singh Murder Case सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड : लेडी डॉन पूजा सैनी गिरफ्तार

सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड : लेडी डॉन पूजा सैनी गिरफ्तार, अब तक 8 गिरफ्तार, पुछताछ जारी

एडिशनल पुलिस कमिश्नर कैलाश विश्नोई का बड़ा धमाका

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साईबर थानाधिकारी चन्द्रप्रकाश और उनकी टीम की कार्यवाही पुलिस ने लेडी डॉन पूजा सैनी को जयपुर से किया गिरफ्तार

सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड में अब लेडी डॉन गिरफ्तार, पुलिस ने लेडी डॉन पूजा सैनी को जयपुर से किया गिरफ्तार, गैंगेस्टर लॉरेंस और रोहित गोदारा का राजस्थान का काम देखती है पूजा, वारदात से पहले हथियार सप्लाई करना और पैसा देना है इसका काम

सिटी फिजियोथैरेपी सेंटर झुंझुनूं

वारदात के बाद हथियार वापस लेने का काम भी है इसी लेडी डॉन का, फर्जी ID से एक युवक के साथ जयपुर में रह रही थी पूजा सैनी, कई फर्जी ID भी की गई पूजा से बरामद, पुलिस की टीम कर रही पूछताछ

आरोपी की पहचान टोंक निवासी पूजा सैनी के रूप में हुई है। हालांकि हथियारों का जखीरा लेकर पति महेंद्र उर्फ समीर फरार हो गया। कमिश्नर बीजू जॉर्ज जोसेफ का कहना है कि पूजा डेढ़ साल से यहां रह रही थी। गोगामेड़ी हत्याकांड से पहले हफ्तेभर शूटर नितिन फौजी को फ्लैट में रखा था। महेन्द्र ने ही नितिन फौजी की रोहित और वीरेंद्र से बात करवाई थी। 5 दिसंबर को सुबह महेन्द्र ने 3 पिस्टल और कारतूस दी थी।

लॉरेंस की गैंग से जुड़ा है पूजा का पति महेंद्र, घर में मिली एके 47 की फोटो

पुलिस जांच में महेंद्र के फ्लैट की तलाशी में कई वाहनों की आरसी, पैन कार्ड, आधार कार्ड, मैमोरी कार्ड मिले हैं। साथ ही एक एके 47 की फोटो भी मिली है। हथियार तस्करी के लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नेटवर्क संचालित करने के अहम सबूत मिले है। इस बात के भी तथ्य सामने आ रहे हैं कि लॉरेंस गैंग द्वारा की गई कई घटनाओं में महेंद्र और पूजा का हाथ हो सकता है। महेंद्र और पूजा एक साथ जाकर हथियार सप्लाई करते हैं, इससे किसी को शक ना हो। पुलिस के अनुसार, घटना के बाद महेंद्र पत्नी पूजा को छोड़कर भारी हथियारों का जखीरा लेकर फरार हो गया है।

आज के दिन खेतड़ी के लोगों ने विवेकानंद का किया 132 रुपये से भव्य स्वागत

झुंझुनूं न्यूज : आज से 126 साल पहले विवेकानंद ने खेतड़ी को ही अपना ‘दूसरा घर’ कहा

स्वामी विवेकानंद पूरे विश्व में भारत के सनातन धर्म का परचम पहराकर खेतड़ी आए थे तब उनका भव्य स्वागत किया गया था। स्वामीजी के चरणों में सोने की मोहर व चांदी के रुपए अर्पित किए गए थे। आज से करीब 126 वर्ष पहले उनके स्वागत में देसी घी व करीब एक हजार 600 लीटर तेल से जगह-जगह दीप प्रज्जवलित किए गए थे। पूरा खेतड़ी दिवाली की तहर जगमग हो गया था।

स्वामी विवेकानन्द अमरीका के शिकागो में सनातन धर्म का परचम लहराकर 12 दिसबर 1897 को रविवार के दिन खेतड़ी लौटे थे। स्वामी विवेकानंद पर पीएचडी करने वाले डॉ जुल्फिकार की पुस्तक के अनुसार राजा अजीतसिंह सुबह 10 बजे अपने मुंशी जगमोहन लाल के साथ स्वामीजी का स्वागत करने के लिए (12 मील दूर स्थित) बबाई नामक स्थान पर गए। स्वामीजी वहां पहले ही पहुंच चुके थे।

महाराज ने स्वामीजी के चरणों में एक स्वर्णमोहर तथा 5 चांदी के रुपए प्रणामी के रूप में अर्पित किए और काफी समय तक वार्तालाप करते रहे। इसके बाद पन्नासर तालाब पर स्वामीजी को विशेष आसन पर बैठाया गया। मन्दिर के मुख्य पुरोहित ने आकर आरती उतारी और चांदी के 4 रुपए भेंट किए। मुंशी लक्ष्मीनारायण ने 2 रुपए, गणेश ने एक रुपया, बाबू जीवनदास ने एक रुपया तथा खेतड़ी के लागों ने स्वामीजी के प्रति सम्मान में कुल 132 रुपए भेंट किए थे। इसके पश्चात मुंशी जगमोहन लाल ने खड़े होकर सब लोगों की ओर से स्वामीजी के सम्मान में स्वागत भाषण का वाचन किया था।


स्वामी विवेकानंद का खेतड़ी से था दिल का रिश्ता

-खेतड़ी आने से पहले स्वामी विवेकानंद का नाम नरेन्द्र था, खेतड़ी के राजा अजीत सिंह ने ही उनका नाम स्वामी विवेकानंद रखा।
-हम स्वामीजी की भगवावस्त्रों में जो तस्वीर देखते हैं वह पगड़ी व अंगरखा भी खेतड़ी के राजा ने भेंट किए थे। यही वस्त्र बाद में स्वामीजी की पहचान बन गए।
– विश्व धर्म सम्मेलन में हिस्सा लेने शिकागो जाने के लिए ओरियन्ट कम्पनी के पैनिनशुना नामक जहाज का टिकट राजा अजीत सिंह ने ही करवाकर दिया था।
– वर्ष 1891 से 1897 के बीच स्वामीजी खेतड़ी तीन बार आए।
– पहली बार 82, दूसरी बार 21 और तीसरी बार 9 दिन रुके।
-स्वामीजी खेतड़ी को अपना दूसरा घर बताते थे।

करतल ध्वनि से गूंज उठा था सदन

शिकागो में अपने भाषण के प्रारंभ में जब स्वामी विवेकानंद ने ‘अमेरिकी भाइयों और बहनों’ कहा तो सभा के लोगों की करतल ध्वनि से पूरा सदन गूंज उठा था। उनका भाषण सुनकर विद्वान चकित हो गए। उन्होंने कहा था, मैं एक ऐसे धर्म का अनुयायी होने में गर्व का अनुभव करता हूं जिसने संसार को सहिष्णुता तथा सार्वभौम स्वीकृत दोनों की ही शिक्षा दी है। हम लोग सब धर्मों के प्रति केवल सहिष्णुता में ही विश्वास नहीं करते, वरन समस्त धर्मों को सच्चा मानकर स्वीकार करते हैं।
मुझे ऐसे देश का व्यक्ति होने का अभिमान है जिसने इस पृथ्वी के समस्त धर्मों और देशों के उत्पीडि़तों और शरणार्थियों को आश्रय दिया है।

एक्सपर्ट व्यू :-

आज से 126 साल पहले स्वामी विवेकानंद अमेरिका से खेतड़ी लोटने पर 9 दिन तक खेतड़ी – प्रवास पर रहें | जिसमें उनका स्वागत – भाषण,शिक्षा व वेद पर व्याख्यान तथा शास्त्र – अध्ययन जैसे कार्यक्रम रहे डॉ.जुल्फिकार भीमसर गांव के युवा लेखक व चिन्तक