
शहीद कुलदीप सिंह राव का आज अपने पैतृक गांव में अंतिम संस्कार होगा। कुलदीप के चचेरे भाई मनोज राव ने ने बताया कि शहीद कुलदीप सिंह राव का बचपन से ही पायलट बनने का सपना था। इस सपने को उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन से पूरा किया। करीब 2 महीने पहले कुलदीप राव परिवार के साथ 3 दिन छुट्टियां मनाने वाघा बॉर्डर पर गए थे। कुलदीप काफी खुश थे। उन्होंने बताया कि कुलदीप बहुत ही मिलनसार था।
मनोज कुमार राव ने बताया कि शहीद कुलदीप सिंह राव की पार्थिव देह गुरुवार को दोपहर 2:30 बजे कोयंबटूर से रवाना होकर पालम एयर बेस पर 7:40 पर पहुंची। शहीद कुलदीप सिंह राव को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। कुलदीप सिंह की पत्नी यशवनी ढाका और बहन नेवी ऑफिसर अभिता मलिक ने शहीद कुलदीप की पार्थिव देह रिसीव की। शहीद का शव शुक्रवार को उनके पैतृक गांव घरडाना खुर्द लाया जाएगा। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार होगा।

अंतिम संस्कार स्थल पर 11 हजार वोल्ट की लाइन हटाई
शहीद कुलदीप सिंह राव का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव चिड़ावा के घरडाना खुर्द में किया जाएगा। जिस जगह उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। वहां 11 हजार वोल्टेज की लाइन जा रही थी। उसे बिजली विभाग के कर्मचारियों ने हटा दिया। खेतड़ी नगर के एईएन आजाद सिंह ने बताया कि देर रात हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट कर दिया गया है।

पूरे गांव में शोक
सरपंच महेंद्र राव ने बताया कि देश के लिए कुलदीप ने जान दी है। पूरे गांव में शोक की लहर है, लेकिन सब लोगों को कुलदीप की शहादत पर गर्व है। पूरा गांव शहीद के अंतिम संस्कार शामिल होगा।
शहीद स्क्वॉड्रन लीडर कुलदीप सिंह की मां कमला देवी की आंखें नम हैं, लेकिन उन आंखों में बेटे के लिए गर्व भी है। कुलदीप की मां ने कहा कि मेरा बेटा शहीद हो गया। मेरे बेटे की यही कमाई है। देश की सेवा करते हुए बेटा शहीद हुआ है। अब बहू को भी सेना में भेजूंगी।
7 महीने पहले आए थे गांव
शहीद कुलदीप राव के चाचा के बेटे और खुद भी एक्स नेवी पर्सन राजेंद्र राव ने बताया कि बचपन से ही कुलदीप पायलट बनना चाहता था। खिलौने का हवाई जहाज हाथ में लेकर घूमता था। कहता था कि एक दिन मैं पायलट जरूर बनूंगा। राजेन्द्र ने बताया कि 7 महीने पहले कुलदीप परिवार में चाचा के लड़के की शादी में अपने गांव घरडाना खुर्द आए थे। अपने स्कूल भी गए थे। वहां बच्चों से मिलकर उन्हें सेना में जाने के लिए प्रेरित किया।
